देहरादून पर बहुत बड़ा खतरा...एक्टिव हुआ 1 करोड़ साल पुराना फॉल्ट !

देहरादून पर बहुत बड़ा खतरा...एक्टिव हुआ 1 करोड़ साल पुराना फॉल्ट !

Red alert for dehradun-0417  - उत्तराखंड न्यूज, भूकंप, Uttarakhand News, earthquaउत्तराखंड,

देहरादून में भूकंप का खतरा बढ़ गया है। इस शहर में एक करोड़ साल पुराना भूकंपीय फॉल्ट सक्रिय हालत में मिला है। इससे वैज्ञानिक सकते में हैं। बता दें कि शहरी इलाका जोन चार और पर्वतीय क्षेत्र जोन पांच में है। यहां के पर्वतीय क्षेत्रों में अक्सर भूकंप के झटके लोगों के दिलों में दहशत कर जाते हैं। भूकंपीय फॉल्ट सक्रिय होने से भूगर्भ में कितनी ऊर्जा का जमाव हो गया है। इसका अंदाजा वैज्ञानिकों को भी नहीं है। ये ऊर्जा विशाल भूकंप के रूप बाहर आ सकती है। लेकिन ये कब बाहर आएगी इसका जवाब भी फिलहाल वैज्ञानिकों के पास नहीं है। फॉल्ट की सक्रियता का खुलासा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की रिसर्च में हुआ है। भूकंप की दृष्टि से देहरादून अति संवेदनशील श्रेणी यानी जोन पांच में शामिल है। हिमालय की उत्पत्ति के बाद भी करोड़ों साल तक इसके निर्माण की प्रक्रिया जारी रही और इसी में से एक करीब 1600 किलोमीटर लंबे सब-हिमालय का निर्माण हुआ। खास बात यह कि इस निर्माण की तस्दीक करता एक अहम फॉल्ट उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के शहंशाही आश्रम क्षेत्र में है।

इसे शहंशाही आश्रम फॉल्ट या मेन बाउंड्री थ्रस्ट भी कहा जाता है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार इस फॉल्ट की सक्रियता का पता इस बात से चलता है कि यहां पर करीब 120 करोड़ साल पुरानी चट्टानें महज 25 हजार साल पुराने दून के अवसादों के ऊपर चढ़ रही हैं। पहले इस अवसाद की उम्र 30 हजार बताई जा रही थी, लेकिन वाडिया संस्थान के ताजा शोध में ये उम्र 25 हजार आंकी गई। संस्थान के मुताबिक सामान्य स्थिति में 120 करोड़ साल पुरानी चट्टानें नीचे होनी चाहिए। इस सक्रियता के चलते भूभाग दक्षिण की तरफ खिसक रहा है। यानी धरती के नीचे पैदा हो रहा तनाव ही इस सक्रियता का कारण है, लेकिन इस क्षेत्र में अभी तक कोई भी स्तरीय भूकंप रिपोर्ट नहीं किया गया है। साफ है कि फॉल्ट के सक्रिय होने के बाद भी ऊर्जा बाहर नहीं आ पा रही। ये तो कहा जा सकता है कि ये ऊर्जा कभी भी भूकंप के रूप में बाहर आ सकती है। लेकिन ये भूकंप कब आएगा और उसकी तीव्रता कितनी होगी, ये कह पाना मुश्किल है।

वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक शहंशाही आश्रम के फॉल्ट जैसी सक्रियता मोहंड के फॉल्ट में भी नजर आ रही है। करीब पांच लाख साल तक पुराने इस फॉल्ट को हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट भी कहा जाता है। इसकी सक्रियता का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने सब हिमालय की एक करोड़ साल पुरानी चट्टानों और महज 3363 साल पुराने गंगा-यमुना के मैदान के अवसादों की स्थिति का अध्ययन किया। पता चला कि फॉल्ट की सक्रियता के चलते एक करोड़ साल पुरानी चट्टानें यहां पर भी नए अवसाद के ऊपर चढ़ रही है। इसके साथ ही यहां पर धरातलीय बदलाव का भी अध्ययन किया गया। फॉल्ट की सक्रियता के कारण भूभाग हर साल 13.8 मिलिमीटर दक्षिण की तरफ और 6.9 मिलीमीटर ऊपर की तरफ उठ रहा है। इस फॉल्ट में भी एमबीटी की तरह कोई भूकंप रिपोर्ट नहीं किया गया है, लिहाजा यहां पर बेहद शक्तिशाली भूकंप की आशंका बनी है। कुल मिलाकर कहें तो देहरादून पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।


Uttarakhand News: Red alert for dehradun-0417

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