उत्तराखंड में भारी बारिश-भूस्खलन से हाहाकार, 58 दिन में 32 लोगों की मौत..38 घायल

लगातार जारी बारिश से बिगड़े हालात ने पहाड़ के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़े देखकर आपको भी डर लगेगा...

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एक तरफ उत्तराखंड से पलायन रोकने की बात हो रही है, लेकिन पहाड़ों में रहने की कीमत लोगों को किस तरह चुकानी पड़ रही है, ये हम सभी जानते हैं। बारिश होती है तो यहां के लोग खुशी से झूमते नहीं, डर से सहम जाते हैं। मानसून का मौसम अपने साथ आपदा लेकर आता है, और ये हर साल होता है। प्राकृतिक आपदा में हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा देते हैं, कई घर सैलाब की भेंट चढ़ जाते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। उत्तराखंड में मानसून सीजन के दौरान पिछले 58 दिन में 32 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 38 लोग घायल हैं, अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं। आपदा के लिहाज से उत्तराखंड बेहद संवेदनशील राज्य है। मानसून के सीजन में यहां हर तरफ तबाही के निशान दिखते हैं। लगातार हो रही बारिश की वजह से जमीन का धंसना, भूस्खलन और बरसाती नालों ने लोगों की चिंता बढ़ाई हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वो वाकई डराने वाले हैं।

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अतिवृष्टि का सबसे ज्यादा असर चमोली जिले पर पड़ा है, जहां हादसों में 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पौड़ी और टिहरी में अतिवृष्टि के चलते हुए हादसों ने 4-4 लोगों की जान ले ली। भूस्खलन के चलते कई घर जमींदोज हो गए। कई में दरारें पड़ी हैं और वो रहने लायक नहीं रहे। 35 भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं, 103 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। 348 मवेशियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। पिछले साल भी आपदा में 101 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी, 53 लोग घायल हुए थे, 3 लापता लोगों का अब तक सुराग नहीं लगा। वहीं लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों से संवेदनशील जगहों को चिन्हित करने और जरूरत के वक्त जल्द से जल्द सहायता मुहैय्या कराने को भी कहा है।


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