उत्तराखंड को बेशकीमती सौगात देकर चली गईं सुषमा स्वराज, कभी देवभूमि से थीं सांसद

स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के वक्त सुषमा स्वराज ने राज्यसभा सदस्य के तौर पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया था...

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज करोड़ों देशवासियों को रुलाकर चली गईं। किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि सुषमा स्वराज जैसी दिग्गज नेता ऐसे अचानक, बिना कुछ कहे चली जाएंगी। उत्तराखंड में भी शोक की लहर है। उत्तराखंड से उनका अटूट रिश्ता रहा है। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने जो काम किए, उन्हें उत्तराखंड हमेशा याद रखेगा। सुषमा स्वराज के प्रयासों से ही उत्तराखंड के ऋषिकेश में एम्स की स्थापना हो सकी। आज पहाड़ के हजारों लोग एम्स अस्पताल की सेवाओं का फायदा उठा रहे हैं। पहले इन लोगों को इलाज के लिए दिल्ली जैसे शहरों में भागना पड़ता था। जिससे पैसे की बर्बादी तो होती ही थी, समय पर इलाज भी नहीं मिल पाता था। सुषमा स्वराज की बदौलत ही ऋषिकेश एम्स की सौगात मिल सकी। आगे जानिए सुषमा स्वराज का उत्तराखंड से क्या रिश्ता था।

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वह उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य भी रह चुकी थीं। प्रदेश की जनता के बीच वो बेहद लोकप्रिय थीं। वो सादगी से रहती थीं, यही सादगी उन्हें खास बनाती थी। लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव, स्टार प्रचारकों में सुषमा स्वराज की हमेशा डिमांड रही। लोग उन्हें सुनना चाहते थे। उत्तराखंड राज्य गठन के वक्त जब उत्तराखंड में राज्यसभा की तीन सीटें बनीं, तो इनमें से एक सीट का प्रतिनिधित्व सुषमा स्वराज ने किया था। उस वक्त स्व. अटल बिहारी वायपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी। उत्तराखंड से वायपेयी सरकार में तीन मंत्री थे। जिनमें सुषमा स्वराज के अलावा लोकसभा सदस्य बची सिंह रावत और भुवनचंद्र खंडूड़ी शामिल थे। जब वो केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री बनीं तो उन्होंने उत्तराखंड का खास ख्याल रखा और यहां एम्स की स्थापना कराई। 28 मई 2015 को सुषमा स्वराज आखिरी बार देहरादून आईं थीं। उस वक्त उन्होंने जनता को संबोधित भी किया था। मंगलवार को जैसे ही उनके निधन की सूचना मिली, हर उत्तराखंडवासी स्तब्ध रह गया। सुषमा स्वराज भले ही अब दुनिया में नहीं रहीं, पर वो देश के लिए जो योगदान दे गईं हैं, उसकी बदौलत वो हर देशवासी के दिल में हमेशा जिंदा रहेंगी।


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