टिहरी गढ़वाल बस हादसे से जुड़ी बड़ी खबर, इस वजह से गई 9 मासूम बच्चों की जान

टिहरी में हुए स्कूल वैन हादसे की असल वजह सामने आ गई है, वैन को 20 साल का लड़का चला रहा था...पढ़िए पूरी खबर

tehri bus accident update - उत्तराखंड न्यूज, बदरीनाथ हाईवे बस एक्सीडेंट, बदरीनाथ हाईवे एक्सीडेंट, Uttarakhand News, Badrinath Highway Bus Accident, Badrinath Highway Accident, टिहरी गढ़वाल स्कूल बस एक्सीडेंट, Tehri Garhwal Schoo, uttarakhand, uttarakhand news, latest news from uttarakhand

टिहरी में मंगलवार की सुबह स्कूल के लिए निकले 9 मासूम अब कभी घर नहीं लौटेंगे। सोचिए जिन बच्चों को मां ने कलेजे से लगाकर पाला हो, जब उनके बेजान शरीर सामने पड़े देखे होंगे, तो उन पर क्या गुजरी होगी। टिहरी के जिस अस्पताल में हादसे के शिकार बच्चों की डेड बॉडी रखी हुई थी, वहां माता-पिता की चीख-पुकार मची थी। हर कोई गमगीन था। ज्यादातर लोगों के लिए ये सिर्फ एक खबर होगी। हो सकता है कुछ लोग आज अफसोस भी जताएं, लेकिन दिन गुजरने के साथ सब अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाएंगे। पर जिन परिवारों ने अपने बच्चे खो दिए हैं, उनके लिए जिंदगी हमेशा के लिए थम गई है। हम उन लोगों के दर्द का अंदाजा भी नहीं लगा सकते, जिन्होंने टिहरी में हुए हादसे में अपने बच्चे खो दिए। छोटे ताबूत, दुनिया में सबसे भारी होते हैं। भगवान ना करे कि किसी माता-पिता की जिंदगी में ऐसा दिन आए।

टिहरी के लंबगांव में छात्रों से भरी जो मैक्स हादसे का शिकार हुई, उसे 20 साल का एक लड़का चला रहा था। इस लड़के को स्कूल प्रबंधन ने 3 दिन पहले ही काम पर रखा था। 10 सीटर वैन में 20 छात्रों समेत 22 लोगों को ठूंसा गया था। ये भी पता चला है कि जिस लड़के को काम पर रखा गया था, उसे शिक्षा विभाग के अधिकारी ने जबर्दस्ती रखवाया था। सुबह साढ़े 7 बजे मैक्स कंगसाली के पास गहरी खाई में जा गिरी। 4 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया। हादसे वाली जगह पर बच्चों के लंच बॉक्स, किताबें और स्कूल बैग बिखरे थे, 9 परिवारों के मासूम ये ही आखिरी निशानी छोड़ गए हैं। जिसने भी ये देखा उसका दिल रो पड़ा। मरने वालों में साहिल, आदित्य, वंश, अभिनव, विहान, ईशान, ऋषभ और अयान शामिल हैं। इन बच्चों की उम्र महज 4 से 13 साल थी। बौराड़ी का अस्पताल मांओं की चीत्कार से गूंज रहा था।

मासूमों की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस से धक्का-मुक्की भी की। लोगों ने शव उठाने से इनकार कर दिया और डीएम-मंत्री को मौके पर बुलाने की मांग करने लगे। ग्रामीणों का आरोप था कि प्रशासन और 108 एंबुलेंस हादसे के ढाई घंटे बाद मौके पर पहुंची। अगर समय पर मदद मिलती तो कई बच्चों की जान बच जाती। एंजल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल प्रबंधन भी मौके पर नहीं पहुंचा। स्कूल वाले स्कूल बंद कर गायब हो गए। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के एक अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि उप शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह ने स्कूल पर दबाव डालकर इस मैक्स को स्कूल वैन के तौर पर लगवाया था। गाड़ी चलाने वाला लड़का भी धनवीर सिंह का परिचित है। वो नौसिखिया था। 3 दिन पहले ही उसे काम पर रखा गया था। ग्रामीणों ने उप शिक्षा अधिकारी के निलंबन की मांग की। हादसा क्यों हुआ, किसकी गलती से हुआ इस पर अब तमाम बहस हो रही है, लेकिन कड़वा सच ये है कि हादसे में जान गंवा चुके 9 मासूम अब कभी घर नहीं लौटेंगे। बहस की बजाय कोशिश ये रहनी चाहिए कि ऐसे हादसे फिर कभी ना हों, किसी मां को अपने कलेजे के टुकड़े को यूं ना खोना पड़े।


Uttarakhand News: tehri bus accident update

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें