पहाड़ में छात्राओं पर खूंखार बंदरों का हमला..घायल छात्राएं अस्पताल में भर्ती

पहाड़ में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है...बंदर हिंसक हो रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं।

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पहाड़ में बंदर आंतक का पर्याय बन गए हैं, ये खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर रहे हैं, घरों से सामान उठाकर ले जा रहे हैं, और तो और लोगों को काट कर घायल कर रहे हैं। उत्तराखंड के तीर्थस्थलों की तो पूछो ही मत, हरिद्वार से लेकर हल्द्वानी तक इन बंदरों ने लोगों को परेशान कर रखा है...हर जगह से इनके आतंक की खबरें आ रही हैं...लोग घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं...ताजा मामला अल्मोड़ा का है, जहां परीक्षा दे जा रही दो छात्राओं पर बंदरों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया, दोनों छात्राएं अस्पताल में भर्ती हैं। बक्शीखोला की रहने वाली हर्षिता और आस्था जोशी परीक्षा देने के लिए जा रही थीं, इसी दौरान बंदरों का एक झुंड उन पर झपटने लगा...डर के मारे छात्राओं ने रास्ते से नीचे खेतों में छलांग लगा दी, जिस वजह से वो घायल हो गईं। छात्राओं की चीख-पुकार सुन राहगीर वहां पहुंचे और हल्ला मचाकर बंदरों को भगाया। दोनों छात्राएं इस वक्त अस्पताल में भर्ती हैं। यहां कैंट इलाके में भी ऐसी ही घटना हुई है, जहां खत्याड़ी में रहने वाले युवक पर बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों ने उसके पैर को काट कर बुरी तरह घायल कर दिया। घायल युवक को लोगों ने अस्पताल में दाखिल कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

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पहाड़ के लगभग हर जिले में इस वक्त बंदरों के आतंक से लोग त्रस्त हैं, आमतौर पर बंदरों के प्रति लोगों में श्रद्धा होती है यही वजह है कि उनके हमले की घटनाओं को भी लोग इग्नोर कर देते हैं, लेकिन ये हल्के में लेने वाली बात नहीं है। समस्या बेहद गंभीर है क्योंकि पहाड़ में बंदर हिंसक हो रहे हैं। इनकी वजह से खेती के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंच रहा है, वन विभाग भी इन पर नियंत्रण बनाए रखने में नाकाम साबित हो रहा है। साल 2015 में अक्टूबर महीने में बंदरों के बंध्यीकरण की योजना भी चलाई गई थी, पर ये भी फेल रही। उस वक्त हरिद्वार वन प्रभाग के चिड़ियापुर में खोले गए राज्य के पहले रेस्क्यू सेंटर में अक्टूबर 2017 तक केवल 1200 बंदरों की ही नसबंदी हो पाई थी। इस वक्त उत्तराखंड में बंदरों की तादाद लाखों में है जो कि पहाड़ों के साथ-साथ आबादी वाले इलाकों में भी लोगों की नाक में दम किए हुए हैं, ये लोगों पर हमला करने लगे हैं। पहाड़ के लोग प्रशासन से इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं, अब देखना ये है कि प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।


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