पहाड़ का भोटिया कुत्ता..तेज निगाहें, सुडौल बदन...बाघ-तेंदुओं से अकेले ही भिड़ जाता है

चलिए आज आपको पहाड़ के भोटिया नस्ल के कुत्ते के बारे में बता देते हैं। प्रकाश चन्द और भूपेन्द्र नेगी की ये खास रिपोर्ट जरूर पढ़िए...जानिए भोटिया के बारे में सब कुछ

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पहाड़ का भोटिया कुत्ता...ये नाम जुबां पर आते ही शायद दुनिया की बाकी नस्लों के कुत्ते फीके नजर आते हैं। इनकी गिनती सबसे बुद्धिमान और ताकतवर नस्ल में होती है, जिनकी विशुद्ध प्रजाति उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पायी जाती है,पर इनकी मिलीजुली प्रजाति निचले हिमालयी क्षेत्रों में भी देखी गयी है। जनपद चमोली के ऊचाई वाले गाँव जैसे नीति, माणा, मलारी,गमसाली ,रैणी ,लाता ,पाणा ,ईराणी, कनोल, सुतोल, बहुत सारे ऐसे गाँव है, जहाँ पर लगभग 3 हजार भेड़ बकरियों की सुरक्षा के लिए एक बेहतरीन बिकल्प है, यह अधिकतर ठंडे इलाके में पाले जाते हैं। बच्चों पर ये कभी नाराज नहीं होता। भोटिया या भोटी कुत्ते दरअसल तिब्बतन मस्टिफ की ही एक प्रजाति है। जो अधिकतर काले रंग के होते हैं। भारी जबड़ा,सुडोल बदन और शांत स्वभाव इनकी खास पहचान है। आम कुत्तों की तरह अनायास ही भौं-भौं नहीं करते बल्कि बड़ी सजगता से पहरेदारी करते हैं। वफादार के साथ इनके बुद्धिमान और बलवान होनी की खूबी इनको और भी खास बनाती है। ताकत की बात करें तो ये अकेले बाघ से भिड़ सकते हैं,तेंदुए और गुलदार तो इसके सामने टिक नहीं पाते।

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घुम्मतू भोटिया लोगों के अलावा इस प्रजाति के कुत्तों को अब आम लोग भी घर की रखवाली के लिये पालने लगे हैं। फेडरेशन ऑफ साइनोलोजिक इंटरनेशनल के अनुसार लगभग 350 नस्लों के कुत्ते पूरे विश्व में हैं। इतनी सारी नस्ल के कुत्तों के बीच भोटिया नस्ल का कुत्ता बेहद खास होता है। जितना शांत, उतना ही खतरनाक...बच्चों से प्यार करने वाला और परिवार के दुश्मनों पर पैनी निगाह रखने वाला कहा जाता भोटिया। गठीला बदन और रौबदार चेहरा देखकर आपको डर जरूर लगेगा। भोटिया की सबसे बड़ी खासियत क्या है ? आम तौर पर 6-6 महीने बकरियां लेकर बुग्याल और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले चरवाहों के पास ये कुत्ता होता है। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन वास्तव में भोटिया की कुछ खासियत अलहदा होती हैं। बकरी पालने वाले अच्छे भोटिया कुत्ते की पहचान कैसे करते हैं ? ये भी हम आपको बता रहे हैं।

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कहते हैं जब भोटिया पैदा होकर थोड़ा सा बड़ा होता है, तो उसे बकरियों के साथ जंगलों में छोड़ दिया जाता है। अब इसे आनुवांशिक लक्षण कहें या कुछ और...भोटिया बकरी के बच्चों की सुरक्षा में लगा रहता है और मुश्किल पड़ने पर उन्हें अपने जबड़े में प्यार उठाकर वापस मालिक के पास ले आता है। इसके अलावा भेड़ों के लिये इनका बनाया सुरक्षाचक्र अभे़द्य होता है। यूं न समझिए कि इन्हें बचपन से ये सब कुछ सिखाया जाता है। ये आनुवांशिक है और वास्तव में ये चमत्कार ही है। आप किसी भी भोटिया नस्ल के कुत्तों को भेड़ों के आस-पास छोड़ दीजिए। वो खुद ही ऐसा त्रिकोणीय सुरक्षा चक्र बनाते हैं कि परिंदा भी भेड़ों पर पर नहीं मार सकता। किसी भी प्रकार के खतरे के दौरान ये बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमला कर देते हैं। उत्तराखंड में उत्तरायण मेले पर इस नस्ल के कुत्ते खरीदे-बेचे जाते हैं। पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें।


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