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खतरा: उत्तरकाशी की धरती दे रही है खतरे के संकेत, 7 साल में 18 बार भूकंप

भूंकप के लिहाज से उत्तरकाशी बेहद संवेदनशील जिला है, यहां जमीन के नीचे भूगर्भीय गतिविधियां चलती रहती हैं। कुछ लापरवाहियां बड़ी तबाही का सबब बन सकती है।

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प्राकृतिक आपदा के लिहाज से उत्तराखंड बेहद संवेदनशील राज्य है। हाल ही में यहां के उत्तरकाशी जिले में लगातार 2 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। पिछले 7 साल में उत्तरकाशी की धरती 18 बार कांप चुकी है, जिससे यहां के लोग बेहद डरे हुए हैं। हालांकि प्रकृति की तरफ से मिल रही चेतावनी को अनदेखा कर यहां बहुमंजिला इमारतों का निर्माण लगातार जारी है। ये अनदेखी आने वाले समय में बड़े हादसे का सबब बन सकती है। उत्तरकाशी जिला भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील जोन 4 और 5 में आता है। भूगर्भीय दृष्टी से ये सीमांत जिला बहुत संवेदनशील है। टैक्टोनिक प्लेट्स जिले के नीचे से होकर गुजर रही है, इनमें सामान्य हलचल होने पर भी भूकंप का खतरा बना रहता है। 20 अक्टूबर 1991 में उत्तरकाशी पहले भी भूकंप की तबाही से जूझ चुका है। उस वक्त यहां पर 6.8 तीव्रता वाला भूंकप आया था, जिसमें भारी तबाही हुई थी। भूकंप के दौरान 6 सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों मकान जमीन में समा गए थे।

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पिछले लंबे वक्त से यहां पर भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। बीते 7 सालों के भीतर यहां पर 18 से ज्यादा भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं, जिनकी तीव्रता 2.5 रही है। साल 2013 और 2014 में सबसे ज्यादा 5-5 भूकंप के झटके महसूस किए गए, लेकिन इसके बावजूद यहां पर इमारतों का निर्माण लगातार जारी है। इमारतों के निर्माण में भूकंपरोधी मानकों तक का ध्यान नहीं रखा जा रहा। बता दें कि यहां पर साढ़े 12 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के निर्माण पर प्रतिबंध है, इसके बावजूद जमीनों को खोदकर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। बेतरतीब ढंग से बसी घनी बस्तियां भविष्य में बड़े भूकंप के दौरान तबाही का सबब बन सकती हैं। ऐसे में जरुरत है कि प्रशासन प्रकृति की आवाज को अनसुना ना कर...समय रहते नियम विरुद्ध बन रही इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करे, वरना इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


Uttarakhand News: Uttarkashi in danger says report

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