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फेसबुक पर झूठ परोसने वाले सावधान...एक्शन में उत्तराखंड हाईकोर्ट, वकील पर लगा 2 लाख का जुर्माना

फेसबुक पर झूठ परोसने वाले सावधान...एक्शन में उत्तराखंड हाईकोर्ट, वकील पर लगा 2 लाख का जुर्माना

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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप लिखने को लेकर हाई कोर्ट के ही वकील पर 2 लाख का जुर्माना कर दिया है। सोशल मीडिया में बिना सोचे समझे बयानबाजी करने पर हाईकोर्ट के वकील चंद्र शेखर करगेती पर ये जुर्माना किया गया है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग पिछले काफी समय से उत्तराखंड के अधिकारियों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे। इसमें हद तब हो गयी जब बयानबाजी में जाति-सूचक शब्दों का भी प्रयोग होने लगा। फेसबुक पर लगातार हो रही बयानबाजी से परेशान होकर एक अधिकारी ने साल 2016 में देहरादून के बसंत विहार थाने में शिकायत दर्ज करायी थी। इस शिकायत में लिखा गया था कि वकील करगेती सोशल साईट पर अधिकारी के विरुद्ध अभद्र और आपत्तिजनक टिपण्णी कर रहे हैं। पुलिस ने IT एक्ट, SC एक्ट और ST एक्ट के अंतर्गत करगेती पर मुकदमा दर्ज किया, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उत्तराखंड हाई कोर्ट में मामला पंहुचा तो इसकी जांच की गयी। जिसके बाद 8 अगस्त को कोर्ट ने सोशल मीडिया में बयानबाजी को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। फैसले में वकील चन्द्र शेखर करगेती पर दो लाख का जुर्माना लगा कर एक माह में ये जुर्माना जमा करने के आदेश दिये गये हैं।

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हाई कोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट (SC ST) को ये भी आदेश दिए हैं कि ट्रायल कोर्ट प्रकरण मे बेवजह किसी पक्ष को विलंब के लिए छूट न दे। कोर्ट ने मामले में कहा कि इससे पहले के मामलों में हाई कोर्ट ने भ्रामक शपथ पत्र देने पर 10 लाख रुपए तक के जुर्माने लगाए हैं, इस मामले में कोर्ट सिर्फ सबक सिखाने के लिए 2 लाख का जुर्माना लगा रही है। हाई कोर्ट ने वकील करगेती को बिना किसी ठोस सबूत के सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अभद्र पोस्ट करने का दोषी माना है। साथ ही इस बात पर भी सख्त नाराजगी जतायी कि करगेती ने कोर्ट को शपथ पत्र के साथ गलत और भ्रामक जानकारी दी। कोर्ट ने कहा कि भ्रामक तथ्य बताकर करगेती ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। कोर्ट ने माना कि शपथ पत्र के साथ कोर्ट को झूठे दस्तावेज जानबूझकर दिए गये हैं। जिसपर सख्त कार्यवाही करते हुये कोर्ट ने करगेती पर 2 लाख का जुर्माना लगा दिया। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ये भी माना कि करगेती ने एस.सी. और एस.टी. आयोग के सचिव जी.आर. नौटियाल के खिलाफ सोशल मीडिया में उनके कॅरियर से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले माह भी "झूठे और विस्फोटक संदेश" और वीडियो भेजने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 A के तहत एफआईआर दर्ज करने को लेकर एक फैसला सुनाया था। इसके अलावा 2 समुदायों के बीच धार्मिक, जाति, जन्मस्थान और भाषा के आधार पर वैमनस्य फैलाने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश दिए थे। कोर्ट ने ऐसे मामलों के लिए हर जिले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के और ऐसे मामलों में रोजाना सुनवाई के आदेश दिए थे। ये निर्देश पहले से लंबित ऐसे मामलों पर लागू भी लागू होगा। ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए हर जिला जज को ऐसे मामलों को एक विशेष जज को देने को कहा गया था। इस मामले में हर राज्य में एक नोडल अधिकारी बनाया गया था। कोर्ट का कहना था कि राज्य सरकार और नोडल अधिकारी, ऐसे मामलों में हर माह स्थानीय खुफिया यूनिट के साथ बैठक करेंगे, इसके साथ ही सोशल मीडिया पर झूठे संदेशों को रोकने पर एक्शन लेंगे। बहरहाल, इस मामले में हाई कोर्ट के न्यायाधीश लोकपाल सिंह ने अपने आदेश में रजिस्ट्रार जनरल को कहा है कि वो नैनीताल के जिलाधिकारी को ये रकम वसूलने का आदेश जारी करें।


Uttarakhand News: Lawyer in Uttarakhand gets Rs 2 lakh penalty

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