‘देहरादून स्टेडियम का नाम बदलकर शहीद जसवंत सिंह रावत स्टेडियम कर दो’, उठी मांग

‘देहरादून स्टेडियम का नाम बदलकर शहीद जसवंत सिंह रावत स्टेडियम कर दो’, उठी मांग

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एक तरफ देहरादून स्टेडियम का नाम बदलने के लिए उत्तराखंड के अलग अलग हिस्सों से मांग उठ रही है। उधर उत्तराखंड क्षत्रिय कल्याण समिति ने एक अलग ही मांग रखी है। समिति द्वारा अपने ऑफिशियल फेसबुक पेज पर कुछ बातें लिखी गई हैं। इसमें लिखा गया है कि ‘’आप सभी गणमान्यों के बीच एक मांग रखते हुए अत्यंत गर्व और खुशी की अनुभूति हो रही है कि हमारे राज्य उत्तराखंड की राजधानी में नवनिर्मित स्टेडियम जिसका की वर्तमान में नाम स्वर्गीय राजीव गांधी जी के नाम पर है जो कि शायद उपयुक्त भी है चूंकि वह एक प्रसिद्ध राजनेता थे किंतु अब हमारी समस्त पहाड़ी जनता की मांग है कि इस स्टेडियम का नाम उत्तराखंड की ही किसी प्रसिद्ध पहाड़ी विभूति के नाम पर हो’ । इसके अलावा भी इस पोस्ट में कई बातें लिखी गई हैं।

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पोस्ट में आगे लिखा गया है कि ‘अभी पहले हमें सर्वसम्मति से एक नाम का प्रस्ताव बनाना पड़ेगा , सब को किसी एक नाम जैसे शहीद जसवंत सिंह रावत जी के नाम पर एकमत हो कर प्रस्ताव देना पड़ेगा । वैसे आप लोगो द्वारा सुझाये सभी नाम अच्छे और महान विभूतियों के है। किंतु मेरा निजी मत है कि हर किसी के नाम पर कोई न कोई सरकारी इमारत या विभाग की योजनाएं है सिर्फ शहीद जसवंत सिंह रावत जी के नाम पर ही अभी तक कोई बड़ा भवन निर्मित नही है इसलिए ये उपयुक्त समय है कि हम सब उत्तराखंड का हित चाहते हुए पहाड़ के ऐसे वीरों को नमन करे और एकजुट होकर सरकार को ये प्रस्ताव भेजें। ताकि लोकप्रिय सरकार जनता की मांग के अनुरूप ये गौरवशाली व ऐतिहासिक फैसला ले सके’। इसके साथ ही लिख गया है कि ‘आप सबका सहयोग व साथ अपेक्षित है’। आप भी पढ़िए ये फेसबुक पोस्ट।

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1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में 72 घंटे तक एक जवान बॉर्डर पर टिका रहा था। इस जवान ने अकेले बॉर्डर पर लड़कर 24 घंटे चीन के सैनिकों को रोककर रखा था। इस वीर जवान का नाम है कि जसवंत सिंह रावत। जसवंत सिंह रावत अमर हो गए। कहा जाता है कि अब भी सीमा पर उनकी आत्मा निगरानी करती रहती है। उनके लिए सेना ने बकायदा एक घर बनाया है। उनकी सेवा में 24 घंटे सेना के पांच जवान लगे रहते हैं। इतना ही नहीं, रोजाना उनके जूतों पर पॉलिश की जाती है। उनके कपड़े प्रेस किए जाते हैं।


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