बद्रीनाथ में इस वजह से नहीं बजता शंख, एक शक्तिपीठ से जुड़ा है ये सच !

बद्रीनाथ में इस वजह से नहीं बजता शंख, एक शक्तिपीठ से जुड़ा है ये सच !

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आज हम उत्तराखंड की कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि ये जगह उत्तराखंड के अनछुए पहलुओं में से एक है। लेकिन ये दो जगहे मां कूषमाण्डा के आशीर्वाद के लिए जानी जाती है। पहला है जखोली ब्लॉक में पड़ने वाले कुमड़ी गांव की मां कूषमांडा और दूसरी हैं सिल्ला गांव में पड़ने वाले शाणेश्वर। शाणेश्वर के लिए कहा जाता है कि यहां कुछ ऐसा हुआ था कि आज तक बद्रीनाथ में शंख नहीं बजता। जी हां कहा जाता है कि धरती पर ऐसा कोई मंदिर नहीं है, जहां मां दुर्गा कूषमाण्डा अवतार में रहती हैं। मन्दाकिनी के पावन तट पर पर्वतराज हिमालय की गोद मे सिल्ला नामक स्थान पर शाणेश्वर का भव्य मन्दिर है। जन श्रुतियो और लोक कथाओं के आधार पर कहा जाए तो इस पुरातन स्थान पर शाणेश्वर महाराज की पूजा हुआ करती थी।

लेकिन कालान्तर में इस स्थान पर दैत्यों का बोलबाला हो गया। कहा जाता है कि ये दैत्य नरभक्षी हुआ करते थे। जो भी पुजारी मन्दिर में पूजा करने जाता, ये दैत्य उसको अपना निवाला बना देते थे। कहा जाता है कि जब देवता का मात्र एक पुजारी रह गया तो शक्ति के उपासक महात्मा अगस्त्य इस स्थान् पर चले आये। इसके बाद महर्षि अगस्त्य ने उस दिन की पूजा का दायित्व खुद ले लिया। जब महर्षि अगस्त्य पूजा करने के बाद वापस आ ही रहे थे, तभी मायावी दैत्य प्रकट हो गये। इन्हे देखकर महर्षि संकट में पड गये। अचानक वो अपनी कोख को मलने लगे और उस पराशक्ति का ध्यान् करने लगे जिसने ब्रह्मा विष्ण देवताओं को मधु और कैटव जैसे दैत्यों से अभय दान दिया था। महर्षि अगस्त्य ने जैसे ही पराशक्ति का ध्यान किया तभी मां भगवती, कूषमान्डा के दिव्य रूप में प्रकट हो गयी।

कहा जाता है कि विविध आयतों से युक्त उस सिंह वाहिनी ने उसी वक्त दैत्यों का संहार किया। कहा जाता है कि इस दौरान आतापी और वातापी नाम के दो दो दैत्य भाग गये। इनमें से एक दैत्य बद्रीनाथ धाम में छिप गया। तब से लेकर अाज तक बद्रीनाथ में शंख नहीं बजता। वजह है कि कहीं वातापी नाम का दैत्य ना जाग जाए। कहा जाता है कि दूसरा दैत्य सिल्ली की नदी में छिप गया। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां माता साक्षात रूप में निवास करती हैं। इसके साथ ही कहा जाता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से मां की आराधना करता है, उसे उसका मनचाहा वरदान मिलता है। मां अपने भक्तों को कभी भी खाली हाथ नहीं जाने देती। खैर अगर आप अब तक साणेशवर नहीं गए हैं, तो जिंदगी में एक बार जरूर इस मंदिर में जाएं।


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